तिरुपति बालाजी के 10 रहस्य जिसे वैज्ञानिक भी नहीं समझ पाए ।

तिरुपति बालाजी का मंदिर श्री विष्णु भगवान को समर्पित है। यह आंध्र प्रदेश के चितूर  जिले के तिरुपति में स्थित है।तिरुमला के चारों ओर स्थित पहाड़ियां शेषनाग के सात फनों के आधार पर बनी हैं, इसीलिए यह सप्तगिरि भी कहलाती हैं।तिरुपति बालाजी को भारत का ही नहीं बल्कि दुनिया का सबसे अमीर मंदिर माना जाता है।तिरुपति तिरुमला के सात पर्वतों में से एक वेंकटाद्री पर्वत पर स्थित है। तिरुपति वेंकटेश्वर मंदिर दक्षिण भारतीय वास्तु और शिल्प कला का अद्भुत संगम है। कई शताब्दियों पूर्व बना हुआ यह मंदिर देखकर लोगों की आंखें थम जाती हैं।

मंदिर परिसर में बहुत खूबसूरती से बनाए हुए अनेक द्वार, मंडपम एवं छोटे मंदिर हैं। तिरुपति मंदिर में भगवान के दर्शन के लिए यात्रियों के चढ़ने के लिए तिरुमला तिरुपति देवस्थानम नामक विशेष मार्ग बनाया गया है, जिसके द्वारा वेंकटेश्वर भगवान के दर्शन किए जाते हैं।

मंदिर के चमत्कारिक 10 रहस्य:-

1.सदैव जलने वाला दिया-

तिरुपति बालाजी के मंदिर में एक दिया है, जो सदैव जलता रहता है। कोई नहीं जानता है कि वर्षों से चल रहे इस दिए को कब और किसने जलाया था। चौंकाने वाली बात तो या है कि इस दिए में ना तो कभी तेल डाला जाता है और ना ही घी।

2.वेंकटेश्वर जी के बाल-

ऐसा कहा जाता है कि मंदिर में भगवान वेंकटेश्वर स्वामी की मूर्ति पर लगे बाल असली है।ऐसा इसलिए कहा जाता है क्योंकि वह बाल ना तो कभी उलझते हैं और ना रूठे पढ़ते हैं वह हमेशा मुलायम ही रहते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि यहां श्री विष्णु भगवान स्वयं विराजते हैं ।

3.समुद्री लहरों की ध्वनि-

यहां आने वाले वक्त बताते हैं कि भगवान वेंकटेश्वर की मूर्ति पर कान लगाकर सुनने पर समुंदर की लहरों की आवाज सुनाई पड़ती है , कारण है कि मंदिर में मूर्ति हमेशा नम रहती है। यह किसी बड़े रहस्य से कम नहीं है।

4.मूर्ति का स्थान मध्य में या दाएं ओर  –

इस मंदिर का एक चमत्कारी रहस्य यह भी है कि जब आप मंदिर के गर्भगृह में जाते हैं तब आप यह बातें हैं कि मंदिर में मूर्ति मध्य में स्थित है लेकिन जैसे ही आप गर्भगृह से बाहर आते हैं और देखते हैं तो ऐसा लगता है कि मूर्ति दाएं ओर स्थित है।

5.पचाई कपूर का रहस्य-

पचाई कपूर वह कपूर होता है जिसे वैज्ञानिकों के अनुसार माना जाता है कि किसी भी पत्थर से जिसको लगाने से वह पत्थर चटक जाता है। भगवान बालाजी के मूर्ति पर यह पचाई कपूर रोज लगाया जाता है परंतु उनकी प्रतिमा पर कोई असर नहीं होता यह किसी चमत्कार से कम नहीं है।

6.बालाजी के हृदय में विराजमान है माता लक्ष्मी-

प्रत्येक गुरुवार को बालाजी की प्रतिमा पर चंदन का लेप लगाया जाता है और जब उसे उतारा जाता है तब उसमें माता लक्ष्मी की छवि उतर के आ जाती है। इस अद्भुत चमत्कार को भी आज तक कोई समझ नहीं पाया है।

7.नीचे धोती और ऊपर साड़ी का अद्भुत श्रंगार-

ऐसा माना जाता है कि बालाजी की प्रतिमा में ही माता लक्ष्मी का रूप समाहित है इसी कारणवश बालाजी का श्रृंगार नीचे धोती में पहनाकर और एवं ऊपर साड़ी से सजाकर किया जाता है।

8.अनोखे गांव का रहस्य-

तिरुपति बालाजी के मंदिर से 23 किलोमीटर की दूरी पर एक गांव स्थित है जहां बाहरी व्यक्तियों का प्रवेश वर्जित है। इस गांव से बाला जी को चढ़ाने के लिए फल दूध फूल दही घी सब आता है। यहां पर लोग बहुत ही नियम और संयम के साथ रहते हैं यहां तक कि वहां कुमारी की महिलाएं सिले हुए कपड़े धारण नहीं करते।

9.बालाजी की प्रतिमा को आता है पसीना-

बालाजी की प्रतिमा पूर्ण रूप से जीवंत लगती है। बालाजी की प्रतिमा एक विशेष प्रकार के चिकने पत्थर से बनी है। बालाजी के मंदिर के वातावरण को काफी ठंडा रखा जाता है उसके पश्चात भी बालाजी को गर्मी लगती है तथा उनके शरीर पर पसीने की बूंदें देखी जाती हैं उनकी पीठ भी हमेशा नाम रहती हैं।

10.रहस्यमई छड़ी-

बालाजी के मंदिर के मुख्य द्वार पर दरवाजे की दाएं ओर एक छड़ी है। इस छड़ी के बारे में यह कहा जाता है कि बालाजी की बाल्यावस्था में इस छड़ी से ही भगवान बालाजी की पिटाई की गई थी इसी कारण उनकी छुट्टी पर चोट लग गई थी जिसके कारण वर्ष तब से लेकर आज तक उनकी ठुड्डी पर शुक्रवार को चंदन का लेप लगाया जाता है ताकि उनका घाव भर जाए।

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